नाड़ी शोधन प्राणायाम – विज्ञान, विधि और लाभ 🧘 प्राणायाम • विज्ञान • साधना नाड़ी शोधन प्राणायाम वैज्ञानिक अध्ययन • करने की विधि • लाभ • सावधानियाँ नीचे पढ़ें " नाड़ी शोधन प्राणायाम — यह केवल एक श्वास-क्रिया नहीं, बल्कि शरीर के प्राण-तंत्र को शुद्ध करने की एक प्राचीन वैज्ञानिक प्रक्रिया है। जब दोनों नासिका छिद्रों से एकांतरित श्वास ली जाती है, तो मस्तिष्क के दोनों गोलार्ध संतुलित होते हैं और तंत्रिका-तंत्र गहरी शांति में आता है। परिचय नाड़ी शोधन क्या है? 'नाड़ी' का अर्थ है ऊर्जा-नलिका (Energy Channel) और 'शोधन' का अर्थ है शुद्धि। इस प्राणायाम में एकांतरित नासिका (Alternate Nostril Breathing) से श्वास ली और छोड़ी जाती है, जिससे शरीर की 72,000 नाड़ियाँ शुद्ध होती हैं। इसे अनुलोम-विलोम का उन्नत रूप भी कहा जाता है। यह प्राणायाम हठयोग प्रदीपिका, घेरण्ड संहिता और पतंजलि योगसूत्र — तीनों में वर्णित है। आधुनिक विज्ञान ने भी इसके प्रभावों की पुष्टि की है। ...
स्वतंत्रता के बाद डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों का व्यवहारिक क्रियान्वयन भारतीय समाज और राज्य व्यवस्था में अति महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। स्वतंत्रता मिलने के बाद देश ने संविधान के निर्माण के माध्यम से नए लोकतांत्रिक और सामाजिक न्याय आधारित व्यवस्थाओं को स्थापित किया, जिसकी आधारशिला आंबेडकर के विचारों और चिंतन पर टिकी हुई है। इस निबंध में आंबेडकर के विचारों के विभिन्न पहलुओं, उनके व्यवहारिक रूप में क्रियान्वयन, साथ ही उनकी वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक प्रासंगिकता का विस्तारपूर्वक विश्लेषण किया जाएगा। ## आंबेडकर के सामाजिक और राजनीतिक विचारों का ऐतिहासिक संदर्भ भीमराव आंबेडकर का जीवन संघर्ष और उनके विचार विशेषकर जाति व्यवस्था, सामाजिक असमानता, और दलितों के अधिकारों पर केंद्रित थे। वे केवल राजनीतिक स्वतंत्रता को पर्याप्त नहीं मानते थे; उनके अनुसार स्वतंत्रता के बाद का भारत तभी लोकतंत्र कहलाएगा, जब सामाजिक और आर्थिक समानता स्थापित हो। उन्होंने हिंदू समाज की छुआछूत और जाति भेदभाव के विरुद्ध आवाज उठाई और दलितों तथा शोषित वर्गों के कल्याण के लिए स्थायी व्यवस्था की मांग की। स्वतंत्रत...