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Showing posts from November, 2025

नाड़ी शोधन प्राणायाम

नाड़ी शोधन प्राणायाम – विज्ञान, विधि और लाभ 🧘 प्राणायाम • विज्ञान • साधना नाड़ी शोधन प्राणायाम वैज्ञानिक अध्ययन • करने की विधि • लाभ • सावधानियाँ नीचे पढ़ें " नाड़ी शोधन प्राणायाम — यह केवल एक श्वास-क्रिया नहीं, बल्कि शरीर के प्राण-तंत्र को शुद्ध करने की एक प्राचीन वैज्ञानिक प्रक्रिया है। जब दोनों नासिका छिद्रों से एकांतरित श्वास ली जाती है, तो मस्तिष्क के दोनों गोलार्ध संतुलित होते हैं और तंत्रिका-तंत्र गहरी शांति में आता है। परिचय नाड़ी शोधन क्या है? 'नाड़ी' का अर्थ है ऊर्जा-नलिका (Energy Channel) और 'शोधन' का अर्थ है शुद्धि। इस प्राणायाम में एकांतरित नासिका (Alternate Nostril Breathing) से श्वास ली और छोड़ी जाती है, जिससे शरीर की 72,000 नाड़ियाँ शुद्ध होती हैं। इसे अनुलोम-विलोम का उन्नत रूप भी कहा जाता है। यह प्राणायाम हठयोग प्रदीपिका, घेरण्ड संहिता और पतंजलि योगसूत्र — तीनों में वर्णित है। आधुनिक विज्ञान ने भी इसके प्रभावों की पुष्टि की है। ...

स्वतंत्रता के बाद डॉ अंबेडर के विचारों का व्यवहारिक रूप में क्रियान्वन

स्वतंत्रता के बाद डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों का व्यवहारिक क्रियान्वयन भारतीय समाज और राज्य व्यवस्था में अति महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। स्वतंत्रता मिलने के बाद देश ने संविधान के निर्माण के माध्यम से नए लोकतांत्रिक और सामाजिक न्याय आधारित व्यवस्थाओं को स्थापित किया, जिसकी आधारशिला आंबेडकर के विचारों और चिंतन पर टिकी हुई है। इस निबंध में आंबेडकर के विचारों के विभिन्न पहलुओं, उनके व्यवहारिक रूप में क्रियान्वयन, साथ ही उनकी वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक प्रासंगिकता का विस्तारपूर्वक विश्लेषण किया जाएगा। ## आंबेडकर के सामाजिक और राजनीतिक विचारों का ऐतिहासिक संदर्भ भीमराव आंबेडकर का जीवन संघर्ष और उनके विचार विशेषकर जाति व्यवस्था, सामाजिक असमानता, और दलितों के अधिकारों पर केंद्रित थे। वे केवल राजनीतिक स्वतंत्रता को पर्याप्त नहीं मानते थे; उनके अनुसार स्वतंत्रता के बाद का भारत तभी लोकतंत्र कहलाएगा, जब सामाजिक और आर्थिक समानता स्थापित हो। उन्होंने हिंदू समाज की छुआछूत और जाति भेदभाव के विरुद्ध आवाज उठाई और दलितों तथा शोषित वर्गों के कल्याण के लिए स्थायी व्यवस्था की मांग की। स्वतंत्रत...

दिमागी सुकून का रास्ता पेट से होकर जाता है: गट-ब्रेन कनेक्शन की नई समझ।

दिमागी सुकून का रास्ता पेट से होकर जाता है: गट-ब्रेन कनेक्शन की नई समझ अक्सर जब हम मानसिक बेचैनी या भावनात्मक उतार-चढ़ाव महसूस करते हैं, तो हमारा ध्यान दिमाग की जटिलताओं की ओर चला जाता है। लेकिन आधुनिक विज्ञान अब यह संकेत दे रहा है कि हमारी मानसिक शांति की वास्तविक चाबी हमारे पेट में भी छिपी हो सकती है। दिमाग और पाचन तंत्र के बीच यह गहरा संबंध आज शोध का बड़ा विषय है। मस्तिष्क और आंत का अदृश्य संवाद दिमाग और आंत एक विशेष प्रणाली के माध्यम से लगातार एक-दूसरे से संवाद करते हैं, जिसे गट-ब्रेन एक्सिस कहा जाता है। हमारी आंतों में असंख्य सूक्ष्मजीवों का समुदाय रहता है, जिसे माइक्रोबायोम कहा जाता है। ये सूक्ष्मजीव केवल भोजन पचाने में ही नहीं, बल्कि ऐसे रसायनों के निर्माण में भी भूमिका निभाते हैं, जो हमारी सोच, भावनाओं और मानसिक स्थिति को प्रभावित करते हैं। खुशी का रसायन और आंत का संबंध सेरोटोनिन एक महत्वपूर्ण रसायन है जो हमारे मूड को संतुलित रखता है और खुशी की अनुभूति प्रदान करता है। यह जानकर आश्चर्य होता है कि सेरोटोनिन का लगभग 90% हिस्सा दिमाग में नहीं, बल्कि आंतों में बनता है। ...

ध्यान में आनंद की अनुभूति कैसे करें?

ध्यान में आनंद का अनुभव कैसे करें ? परम पूज्य स्वामी परमानंद गिरि जी महाराज द्वारा बताई गई सरल ध्यान विधि। क्या आपका मन ध्यान के दौरान बार-बार भटक जाता है?😢 क्या आप ध्यान में गहरी शांति और आनंद का अनुभव करना चाहते हैं? 🤩 बहुत से लोग ध्यान करते हैं, लेकिन उस परमानंद की अनुभूति नहीं कर पाते, जिसकी वे तलाश करते हैं। आज हम एक ऐसी शक्तिशाली और सरल ध्यान विधि साझा कर रहे हैं, जो परम पूज्य स्वामी परमानंद गिरि जी महाराज ने अपने एक सत्संग में बताई थी। यह अभ्यास न केवल मन को शांति देता है, बल्कि पुरे अस्तित्व को आनंद में डुबो देता है। 🌿 चरण 1: शरीर और मन की तैयारी ध्यान से पहले शरीर को थोड़ा सक्रिय करना मन को तुरंत एकाग्र करने में मदद करता है। 1. आसन: किसी भी सुखद एवं स्थिर आसन में बैठ जाएँ। 2. आगे झुकें: श्वास को पूरा बाहर निकालें और शरीर को आगे झुकाएँ। छाती को जमीन के जितना क़रीब ला सकें, लाएँ। 3. गर्दन: हल्का ऊपर उठी रहे, ताकि मस्तिष्क में रक्त प्रवाह बढ़े। 4. श्वास रोकें: श्वास को बाहर रोकते हुए ध्यान को आज्ञा चक्र (भौंहों के बीच) पर केंद्रित करें। 5. वापस आएँ: श्व...

गुरु नानक: एक अप्रत्याशित यात्रा जो आज भी चलती है

यदि आप गुरु नानक के बारे में सोचते हैं, तो संभवतः आप एक पवित्र व्यक्तित्व की कल्पना करते हैं - किसी ऐसे व्यक्ति की जो हमेशा से ध्यान में लीन रहता था। लेकिन यह सच नहीं है। नानक एक ऐसा व्यक्ति था जो सामान्य जीवन जीता था, परिवार बढ़ाता था, काम करता था, पर साथ ही अंदर से एक गहरी खोज भी करता रहता था। वह एक उदाहरण है कि आध्यात्मिकता और सामान्य जीवन कैसे एक साथ चल सकते हैं।   बचपन: जहां से शुरुआत होती है 15वीं सदी के अंत में, भारत की राजनीतिक स्थिति अस्थिर थी। देश में कई साम्राज्य थे, कई धर्म थे, लेकिन एक बड़ी समस्या थी - लोग एक-दूसरे को समझते नहीं थे। ठीक उसी समय, तलवंडी गांव में एक बालक पैदा हुआ। उसके माता-पिता सोचते होंगे कि एक और बेटा पैदा हुआ है। लेकिन इतिहास को पता था कि यह बालक कुछ अलग होगा। यह बालक - नानक - ने बचपन में ही यह समझ लिया था कि बाहरी रीति-रिवाज केवल समाज की सतह हैं। असली सवाल तो अंदर का है। एक घटना है जो इसे बेहतर समझाती है। जब नानक ग्यारह साल का था, तो उसके पिता को एक व्यापार में निवेश करना था। उसने नानक को 20 रुपये (जो उस समय के लिए बहुत पैसा था) दिए और क...