नाड़ी शोधन प्राणायाम – विज्ञान, विधि और लाभ 🧘 प्राणायाम • विज्ञान • साधना नाड़ी शोधन प्राणायाम वैज्ञानिक अध्ययन • करने की विधि • लाभ • सावधानियाँ नीचे पढ़ें " नाड़ी शोधन प्राणायाम — यह केवल एक श्वास-क्रिया नहीं, बल्कि शरीर के प्राण-तंत्र को शुद्ध करने की एक प्राचीन वैज्ञानिक प्रक्रिया है। जब दोनों नासिका छिद्रों से एकांतरित श्वास ली जाती है, तो मस्तिष्क के दोनों गोलार्ध संतुलित होते हैं और तंत्रिका-तंत्र गहरी शांति में आता है। परिचय नाड़ी शोधन क्या है? 'नाड़ी' का अर्थ है ऊर्जा-नलिका (Energy Channel) और 'शोधन' का अर्थ है शुद्धि। इस प्राणायाम में एकांतरित नासिका (Alternate Nostril Breathing) से श्वास ली और छोड़ी जाती है, जिससे शरीर की 72,000 नाड़ियाँ शुद्ध होती हैं। इसे अनुलोम-विलोम का उन्नत रूप भी कहा जाता है। यह प्राणायाम हठयोग प्रदीपिका, घेरण्ड संहिता और पतंजलि योगसूत्र — तीनों में वर्णित है। आधुनिक विज्ञान ने भी इसके प्रभावों की पुष्टि की है। ...
प्राण मुद्रा: जीवन ऊर्जा को सक्रिय करने वाली मुद्रा परिचय प्राण मुद्रा योग की एक महत्वपूर्ण मुद्रा है जिसे "जीवन की मुद्रा" के रूप में जाना जाता है। यह मुद्रा शरीर में जीवन ऊर्जा या प्राण को सक्रिय और संतुलित करने में सहायक मानी जाती है। प्राण मुद्रा का अभ्यास हमारे ऊर्जा स्तरों को बढ़ाने , प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने , और समग्र स्वास्थ्य को सुधारने में मदद करता है। प्राण मुद्रा कैसे करें आरामदायक स्थिति में बैठें , जैसे कि सुखासन (क्रॉस-लेग्ड पोज़) या पद्मासन (लोटस पोज़)। आप कुर्सी पर भी बैठ सकते हैं। अपनी आंखें बंद करें और अपनी सांसों पर ध्यान केंद्रित करें। दोनों हाथों की अंगुलियों को इस प्रकार से रखें: अंगूठे के सिरे को अनामिका (रिंग फिंगर) और छोटी उंगली (लिटल फिंगर) के सिरों से मिलाएं। तर्जनी (इंडेक्स फिंगर) और मध्यमा (मिडल फिंगर) सीधी रखें। इस मुद्रा को दोनों हाथों से बनाएं और हाथों को घुटनों पर रखें , हथेलियाँ ऊपर की ओर। कुछ मिनटों के लिए इस मुद्रा में रहें , गहरी और स्थिर सांसें लेते हुए। प्राण म...